Matar Ki Kheti Kaise Karen

Matar Ki Kheti Kaise Karen

Matar Ki Kheti Kaise Karen: सर्दियों के मौसम में मटर की डिमांड बहुत ज्यादा होती है जिसके कारण भारतीय  कृषि बाजारो और किसानों को मटर के अच्छे भाव मिल जाते है | और इसी के चलते किसान मटर की खेती कर कम समय में अधिक लाभ कमा सकते हैं | इस लेख के माध्यम से मटर की खेती की संपूर्ण जानकारी जानते हैं | मटर की खेती कैसे करें?

Matar Ki Kheti Kaise Karen

हरी मटर, जिसे मटर के रूप में भी जाना जाता है, भारत में सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली सब्जियों में से एक है और इसकी खेती सबसे पहले इसके हरे फलों के लिए की जाती थी। हरी मटर Leguminous परिवार से संबंधित है। हरी मटर का उपयोग सब्जी व्यंजनों, सूप और जमे हुए डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में भी किया जाता है। हरे मटर की भूसी एक पौष्टिक चारा है और इसे किसी भी जानवर (पशुधन) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है| मटर एक बहुत ही पौष्टिक सब्जी है जो सुपाच्य Proteins, Carbohydrates और Vitamins से भरपूर होती है। इसमें पर्याप्त minerals होते हैं।

मटर की खेती के लिए उचित जलवायु

इसकी फसल को नम और ठंडी जुलाई की आवश्यकता होती है। इसलिए, हमारे देश के अधिकांश हिस्सों में मटर रबी के मौसम में उगाई जाती है। बीज अंकुरण के लिए औसत तापमान 20 से 22 °C और 10 से 18 °C के तापमान पर पौधों की अच्छी वृद्धि और विकास की आवश्यकता होती है।

मटर की खेती के लिए उचित भूमि

चूंकि मटर एक फलीदार फसल है, इसलिए इसे सभी प्रकार की खेती योग्य भूमि में पर्याप्त नमी के साथ आसानी से उगाया जा सकता है। मटर की खेती के लिए मटियार मिट्टी और मिट्टी की भूमि आदर्श है। उचित सिंचाई सुविधाओं के साथ, बलुई दोमट मिट्टी में भी मटर की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।

जलोढ़ क्षेत्रों में निर्जलीकरण के बाद भी मटर की खेती नहीं की जा सकती है। मटर की खेती के लिए, यह उपयुक्त है यदि भूमि का पीएच मान समान (प्राकृतिक) हो।

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खेत की तैयारी कैसे करे

अन्य रबी फसलों की तरह मटर की खेती के लिए खेत तैयार है। फूलगोभी की फसल की कटाई के बाद, मिट्टी की जुताई से जुताई की जाती है। उसके बाद 2 से 3 जुताई घरेलू हल या cultivator से करें। प्रत्येक जुताई के बाद पैड को खेत में चलाना जरूरी है ताकि गांठ टूट जाए और मिट्टी की नमी बनी रहे। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी आवश्यक है।

उर्वरक की मात्रा कितनी होनी चाहिए

मटर में आमतौर पर 20 किलो, Nitrogen 60 किलो होता है। Phosphorous बुवाई के समय देना पर्याप्त है। इसके लिए 100-125 किग्रा. diammonium phosphate (डी, ए, बी) प्रति हेक्टेयर लगाया जा सकता है। potassium की कमी वाले क्षेत्रों में 20 किग्रा. Potash (Potash के मुराद द्वारा) दिया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में गंधक की कमी हो, वहां बुवाई के समय गंधक का प्रयोग करना चाहिए। यदि हो सके तो मिट्टी की जांच अवश्य करा ले ताकि पोषक तत्वों की पूर्ति करने में आसानी हो सके।

बुवाई का समय

मटर की बिजाई का सबसे अच्छा समय 10 अक्टूबर से 10 नवंबर तक माना जाता है। यानी मटर की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में की जा सकती है | लेकिन देश में अनेक क्षेत्रों के किसान अगेती फसल लेने के हिसाब से सितंबर महीने में ही मटर की बुवाई कर देते हैं समय से पहले बुवाई करने से मटर की फसल में रोग की संभावना अधिक होती है तथा किसान को उर्वरक एवं उर्वरकों की अधिक आवश्यकता होती है तथा उत्पादन कम होता है, लेकिन मटर के बाजार में शीघ्र आ जाने से इसकी कीमत अच्छी होती है।

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सिंचाई

अच्छे अंकुरण के लिए बुवाई से पहले पानी देना चाहिए। यदि फसल के बाद धान की खेती की जाती है, तो मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर बिना सिंचाई के भी बोया जा सकता है। बुवाई के बाद एक या दो सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई फूल आने से पहले और दूसरी सिंचाई फल आने की अवस्था में करनी चाहिए। अत्यधिक पानी देने से पौधों का पीलापन और उपज कम हो सकती है।

खरपतवार  नियंत्रण

खरपतवार फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और पानी को अवशोषित कर लेते हैं, जिससे फसल खराब हो जाती है और उच्च उपज हानि होती है। विकास के शुरुआती चरणों में, फसल को खरपतवारों की तुलना में अधिक नुकसान होता है। यदि इस दौरान खेत से खरपतवार नहीं हटाया गया तो फसल की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यदि खेत में पडुआ, अदरक, कृष्णनिल, सतपती जैसे चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार उग आए हैं तो 4-5 लीटर स्टॉम्प-30 (pendimethalin) को घोलकर 600-800 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर बिजाई के बाद छिड़काव करना चाहिए। इससे खरपतवार पर काफी नियंत्रण होगा।

मटर की खेती से लाभ

अच्छे कृषि प्रबंधन से लगभग पके स्तर पर 18 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और हरी मटर के लिए 90 से 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है।

अनुमानित कुल लागत- 20,000 रुपए /हेक्टेयर

मटर की उपज- 30.00 क्विंटल/ हेक्टेयर

प्रचलित बाजार मूल्य- 30.00 रुपए/ किलोग्राम

कुल आमदनी- 90,000 रुपए

शुद्ध आय- 70,000 रुपए

यदि आप 5 हेक्टेयर में मटर खेती करते हैं तो आप इससे एक सीजन में 3,50,000 रुपए कमा सकते हैं।

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निष्कर्ष

किसान भाई मटर के बीज की कीमत की बात करें तो यह बीज के चुनाव पर निर्भर करता है। वैसे तो सभी तरह के बीज अनुसंधान संस्थानों के दाम अलग-अलग होते हैं, लेकिन बाजार में मटर के बीज का औसत भाव करीब 180-250 रुपये प्रति किलो यानी 1800 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल है. मटर में मौजूद Rhizobium bacteria मिट्टी में खाद डालने में मदद करते हैं। यदि अगेती किस्मों को अक्टूबर और नवंबर में लगाया जाता है, तो वे अधिक पैदावार के साथ अधिक लाभदायक हो सकते हैं। आजकल मटर को साल भर संरक्षित करके बाजार में बेचा जाता है। वहीं इसका प्रयोग सूखी और मटर की दाल के रूप में किया जाता है|

Credit: PKM Creation

तो किसान मित्रों, यह है मटर की खेती (how to cultivate peas) के बारे में पूरी जानकारी। मुझे उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें। यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो आप हमें एक टिप्पणी छोड़ सकते हैं। पूरा लेख पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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