Saffron Ki Kheti Kaise Karen

Saffron Ki Kheti Kaise Karen

Saffron Ki Kheti Kaise Karen: केसर का दूध आज भी हम हिंदुस्तान के जेहन में रहता है इसका स्वाद आज भी हमारे जेहन को इतना भाता है की हम लोग अपने ख़ास उत्सव या मेहमान नवाजी में इसको आदर्श मानते है |

केसर एक आयुर्वेदिक हर्बल और मुनाफे वाली खेती है, जिसे की हम कुछ जानकारियों के बाद अपने घर पर अपने गार्डन और गमले में भी लगा सकते है। बस जरुरत है तो इसकी सही जानकारी की, तो चलिए मित्रो आज बात करते है केसर क्या है और कैसे की जाती है इसकी खेती। केसर की खेती कैसे करें?

Saffron Ki Kheti Kaise Karen

केसर दुनिया में पाया जाने वाला सबसे महंगा पौधा है | इतना महंगा होने के कारण इसे लाल सोना भी कहा जाता है |केसर (saffron) एक सुगंधित पौधा है। इसके फूल के कलंक (stigma) को केसर, केसर, जाफरोन या केसर कहते हैं। यह परिवार इरिडेसी (Iridaceae), क्रोकस सैटिवस (Crocus sativus) से संबंधित एक छोटा पौधा है। पत्तियां तीव्र, छोटी, लम्बी और नालीदार होती हैं | इनके बीच में एक पुष्पदंड (scapre) निकलता है, जिसमें नीले रंग में एकल या एकाधिक फूल होते हैं। यह केसर समुद्र तल से 1000 से 2500 मीटर की ऊंचाई पर उगाया जाता है। केसर की खेती स्पेन, इटली, ईरान, पाकिस्तान, चीन और भारत के जम्मू-कश्मीर में की जाती है।

जलवायु ,तापमान और मिट्टी

बर्फबारी वाले क्षेत्रों में केसर की खेती अधिक होती है, केसर तीनों मौसमों में उगता है, सर्दी, गर्मी और बारिश, सर्दी बर्फ और गीला मौसम इसके फूलों की वृद्धि को रोकता है। इससे बाद में बड़ी संख्या में नए फूल निकलते हैं, जो इसके लिए बहुत अच्छा है।

इन फूलों में केसर का उपयोग किया जाता है, जो लगभग 20 डिग्री और 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर अच्छी तरह से विकसित हो जाते हैं। उसी तापमान पर इसके पौधे खिलने लगते हैं। वैसे इसकी खेती कई प्रकार से की जाती है। लेकिन मिट्टी की मिट्टी इसकी खेती के लिए आदर्श मानी जाती है।

केसर की उन्नत किस्मे (Improved Varieties of Saffron)

वर्तमान समय में केसर की केवल दो ही किस्मे मौजूद है|

  • कश्मीरी मोंगरा किस्म का केसर (Kashmiri Mongra Variety Saffron ): इस प्रकार के केसर की खेती जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और पंबोर में की जाती है। पौधे 20 से 25 सेमी की ऊंचाई तक बढ़ते हैं। पौधे बैंगनी, नीले और सफेद फूल पैदा करते हैं, जो कीप के आकार के होते हैं | इन फूलों में दो से तीन लाल-नारंगी पंखुड़ियाँ होती हैं, और फूल के अंदर का रेशा केसर होता है। लगभग 75 हजार फूलों में से केवल 450 ग्राम Saffron ही उपलब्ध होता है।
  • अमेरिकन किस्म का केसर (American Saffron):- इस तरह के केसर Saffron को जम्मू-कश्मीर को छोड़कर कई जगहों पर बनाया जाता है। इस प्रकार का केसर Kashmiri Mongra Saffron से सस्ता होता है। इसके पौधों को किसी विशेष जलवायु की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रकार के केसर राजस्थान जैसे शुष्क dryक्षेत्रों में उगाए जाते हैं।
  • पौधो की सिंचाई का तरीका (Plant Irrigation Method):- केसर Saffron के बीज खेत में लगाने के बाद उसमें पानी देना चाहिए। यदि केसर सूखे क्षेत्रों में उगाया जाता है, तो सर्दियों में 15 दिनों तक पानी देना जारी रखना चाहिए। गर्मी के दिनों में सप्ताह में दो बार और बरसात के मौसम में ही जरूरत पड़ने पर पानी दें।

उर्वरक की सही मात्रा (Right Amount of Fertilizer)

खाद की सही मात्रा के लिए खेत तैयार करते समय 10 से 15 गाड़ियाँ पुरानी गाय का गोबर प्रति एकड़ जुताई के समय डालें। इसके अलावा जो किसान रासायनिक खाद का प्रयोग करना चाहते हैं। वह N.P.K.अंतिम जुताई से पहले खेत में सही मात्रा में छिड़काव करना चाहिए, साथ ही सिंचाई के साथ West Decompose पौधों को देना चाहिए।

केसर की तुड़ाई और सुखाई कैसे करे?

केसर Saffron के पौधे खेत में लगाने के तीन से चार महीने बाद केसर देते हैं। जब पौधे के फूलों पर पंखुड़ियां लाल और केसर दिखने लगे तो उन्हें तोड़कर इकट्ठा कर लें। इसके बाद तोड़ी हुई पंखुड़ियों को छायादार जगह पर सुखा लें। जब केसर Saffron पूरी तरह से सूख जाए तो इसे एक बर्तन में निकाल लें।

केसर के पौधों में लगने वाले रोग

Saffron के पौधों में बहुत ही कम रोग लगते है, इसके पौधों में सिर्फ दो तरह के रोग देखने को मिलते है | जिनकी जानकारी इस प्रकार है:-

  • बीज सडन रोग (Seed rot Disease):- पौधों पर छपाई के बाद यह रोग अधिक आम है, और रोग को सड़ांध भी कहा जाता है। रोग के कारण बीज पूरी तरह से सड़ जाता है और अंकुरित होने से पहले पौधे को नष्ट कर देता है।
  •  मकड़ी जाल रोग (Spider web Disease):-यह रोग पौधों की वृद्धि को पूरी तरह से रोक देता है. यह रोग पौधों के Germinated होने के कुछ समय बाद दिखाई देता है|

खरपतवार पर नियंत्रण कैसे करे?

केसर के पौधों को खरपतवारों से बचाने के लिए इसकी शुरुआती देखभाल जरूरी है। कुछ दिनों के बाद जब खेत का मध्य भाग अंकुरित होने लगे तो निराई और छंटाई करनी चाहिए। इसके बाद दो से तीन फावड़े 20 दिन के अंतराल पर करना चाहिए ताकि पौधे अच्छे से विकसित हो सकें।जहां पाला नहीं पड़ता वहां पौधों की देखभाल करना जरूरी है।

केसर की पैदावार और मूल्य

Kashmiri Mongra Saffron केसर एक किलो केसर के लगभग 150,000 फूल देता है, अमेरिकी केसर की बात करें तो यह अपनी उपज से ज्यादा पैदा करता है। एक पिका फार्म में एक किलो तक American Saffron मिलता है, लेकिन दोनों के बाजार भाव में बड़ा अंतर है। कश्मीरी मोंगरा केसर की कीमत करीब 3 लाख रुपये है।

 वहीं अगर अमेरिकी केसर की बात करें तो केसर की गुणवत्ता के आधार पर यह 50 हजार से 2 लाख की कीमत में बिकता है. अगर किसान भाई American Saffron उगाना चाहता है, तो वह प्रति पिका 50 हजार से दो लाख तक कमा सकता है।

Credit: Anil Bisht 4U

निष्कर्ष

केसर एक बहुत ही महंगा मसाला है। इसके अलावा, यह दुनिया भर में बहुत मांग में है क्योंकि इसमें कई औषधीय गुण हैं। इसकी महक के कारण इसका उपयोग कॉस्मेटिक उद्योग में भी किया जाता है। कुल मिलाकर केसर की मांग उसके उत्पादन से कई गुना ज्यादा है। इस वजह से इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। केसर की कीमत 3 लाख रुपये से लेकर 4 लाख रुपये प्रति किलो तक है।केसर की खेती के लिए बलुई दोमट और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी गयी है। रेतीली जमीन में भी इसकी खेती अच्छे तरह से की जा सकती है।

इसे भी पढ़े:

आशा करते है केसर की खेती से जुडी यह लेख आपको पसंद आया होगा, अगर आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो प्लीज कमेंट सेक्शन में हमें बताएँ और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published.